
घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005—धारा 12, 19 और 23—अंतरिम आदेश (इंजंक्शन) जिसमें संपत्ति को बेचने या उस पर कोई भार (encumbrance) बनाने से रोक लगाया गया है—प्रश्न कि क्या धारा 12 के तहत मामला सुन रहे मजिस्ट्रेट को अपने ही दिए गए आदेश की समीक्षा (review) करने का अधिकार है, ताकि गलती को सुधारा जा सके—निर्णीत, हाँ—मजिस्ट्रेट, जो डी.वी. एक्ट के तहत अधिकार का प्रयोग कर रहा है, वह अपने द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश को वापस ले सकता है (recall), रद्द कर सकता है (vacate) या संशोधित (modify) कर सकता है, यदि वह आदेश किसी पक्ष को नुकसान पहुँचा रहा हो या किसी गलती पर आधारित हो— “Actus Curiae Neminem Gravabit” अर्थात, अदालत के कार्य से किसी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुँचना चाहिए—अदालत का यह कर्तव्य है कि वह अपनी गलती को स्वयं सुधार करेसाथ ही, पक्षकार को यह कहना कि वह संपत्ति के अधिकार (title) के लिए सिविल कोर्ट जाए—ऐसा निर्देश गलत है—इसलिए, अधीनस्थ का आदेश रद्द किया जाता है और रिवीजन स्वीकार की जाती है।
