पर्वीन्दर सिंह कित्तना बनाम पंजाब राज्य व अन्य. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने “मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना” को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राज्य से जवाब मांगा..

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🅾️पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने “मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना” को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राज्य से जवाब मांगा


🟥पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में शुरू की गई “मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना” को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर पंजाब सरकार से जवाब मांगा। एक्टिंग चीफ़ जस्टिस रितु बाहरी और जस्टिस निधि गुप्ता की खंडपीठ ने योजना पर रोक लगाने की मांग करने वाली परविंदर सिंह कित्तना की जनहित याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई तीर्थ यात्रा योजना का उद्देश्य तीर्थयात्रियों को देश और राज्य भर के विभिन्न पवित्र स्थानों की सुविधा प्रदान करना है।

🟩याचिका में कहा गया कि “यह राज्य सरकार द्वारा लोन उठाकर और नागरिकों द्वारा भुगतान किए गए करों से धन की बर्बादी है योजना के अनुसार, राज्य तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा और आवास सहित सभी व्यवस्थाओं का प्रबंधन करेगा। याचिका में कहा गया कि सीनियर पीसीएस अधिकारी नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे, जो पहले से मंदिरों का दौरा करेंगे और एसी धर्मशालाओं में भोजन और आवास के लिए आवश्यक व्यवस्था करने और दर्शन की सुविधा के लिए सहयोग करेंगे।

🟧याचिकाकर्ता ने कहा कि यह सामुदायिक शिक्षा के उत्थान और सामाजिक विकास के अन्य मुद्दों को हल करने के लिए सरकार की जिम्मेदारी को पूरा करने के बजाय धार्मिक भावनाओ में व्यस्त है भारत संघ और अन्य बनाम रफीक शेख भिकान और एक अन्य [और अन्य संबंधित मामले] पर भी भरोसा जताते हुए, जिसमें हज सब्सिडी योजना की जांच करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, “हमारा विचार है कि हज सब्सिडी ऐसी चीज है, जिसे समाप्त करना सबसे अच्छा है।

🟦इसमें आगे कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि “हज सब्सिडी की राशि को उत्तरोत्तर कम किया जाना चाहिए, जिससे आज (फैसले की तारीख) से 10 साल की अवधि के भीतर इसे पूरी तरह से समाप्त किया जा सके और सब्सिडी के पैसे का उपयोग समुदाय के उत्थान, शिक्षा और सामाजिक विकास के अन्य सूचकांकों में अधिक लाभप्रद रूप से किया जा सके। उपरोक्त के प्रकाश में याचिका में योजना के संचालन पर रोक लगाने की मांग की गई। मामले को 12 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध करते हुए कोर्ट ने राज्य को सुनवाई की अगली तारीख से पहले याचिका के जवाब में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।

केस टाइटल : पर्वीन्दर सिंह कित्तना बनाम पंजाब राज्य व अन्य

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