यह सर्वविदित नियम है कि वसीयत, वसीयतकर्ता की मृत्यु हो जाने के पश्चात लागू होती है—चूँकि मृत वसीयतकर्ता स्वयं तो वसीयत का समर्थन या खण्डन नहीं कर सकता—इसलिए, वसीयत के प्रस्तावक (लाभ प्राप्त करने वाला व्यक्ति) को वसीयत की वैधता साबित करने के लिए न केवल वसीयतकर्ता के हस्ताक्षर को साबित करना होगा, बल्कि उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 63(सी) के अनुसार उसका उचित सत्यापन भी करना होगा—यदि विपरीत पक्षकार द्वारा वसीयत का निष्पादन प्रश्नगत नहीं भी किया जाता है तब भी प्रस्तावक को कम से कम एक गवाह द्वारा वसीयत को साबित करना अनिवार्य है—यदि वसीयत को साबित करने वाला गवाह उबलब्ध नहीं है या उसकी मृत्यु हो चुकी है, तो उस परिस्थिति में साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 में उपबंधित यथारीति से वसीयत को साबित किया जा सकता है।

