Shri Syed shehzi v/s M/S Gajanand Enterprises.. Crl. Rev. No. 1096/2015

चैक बाउंस के केस में जब कंपनी/फर्म को मुख्य आरोपी (Prime Accused) नहीं बनाया जाता है तो प्रतिनिधिक-दायित्व (Vicarious Liability) के सिद्धान्त के अनुसार अन्य पार्टनर्स के विरुद्ध दायर मुकद्दमा पोषणीय (Maintainable) नहीं है।
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पराक्रम्य लिखित अधिनियम, 1881—धारा 138 एवं 141—दं०प्र०सं०, 1973—धारा 401 सपठित 397—चैक का अनादरण—दण्डादेश के विरुद्ध याचिका—वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति फर्म को की गई थी ना कि व्यक्तिगत रूप से अभियुक्त को—फर्म के 4 पार्टनर होने के बावजूद भी परिवादी ने सिर्फ आरोपी के विरुद्ध मुकद्दमा दायर किया—वाणिज्यिक गैस सिलेंडर फर्म के आफिस में डिलीवर किए गए—चैक आरोपी द्वारा नहीं दिए गए थे, बल्कि कार्यालय के प्रबंधक द्वारा परिवादी को सौंपे गए थे—फर्म को मुकद्दमे में आरोपी नहीं बनाया गया—सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनीता बनाम गॉडफादर ट्रैवल्स (2012), के निर्णयानुसार मुकद्दमा दायर करते समय फर्म को आरोपी बनाया जाना अनिवार्य है—यदि फर्म को मुकद्दमे का पक्षकार नहीं बनाया जाता है तो अकेले आरोपी के विरुद्ध मुकद्दमा चलाने का प्रश्न ही नहीं उठता— सज़ा दिए जाने का प्रश्नगत निर्णय अविधिक और मनमानापूर्ण है—दाण्डिक निगरानी स्वीकार।

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