Urmila Devi v/s State of Bihar. 3 August 2023. Crl. App. (DB) No. 820 0f 2019

भा०दं०वि०, 1860—धारा 302 व 498-क—दं०प्र०सं०, 1973—धारा 313—हत्या—वैवाहिक-क्रूरता—जलने से मृत्यु—दण्डादेश के विरुद्ध अपील—धारा 313 दं०प्र०सं० के कथनों में न्यायालय द्वारा ऐसा कोई भी प्रश्न नहीं पूछा गया कि मृतका को आग किस प्रकार लगी—पोस्टमार्टम में किसी भी एमेटिक गंध की अनुपस्थिति यह पुष्टि करती है कि मृतका की मृत्यु भोजन पकाने के दौरान हुई होगी—डॉक्टर को जिन जगहों पर जलने के निशान मिले थे, वे शरीर के ऊपरी हिस्से पर थे—यदि किसी को जलाकर मारा जाता है तो उसके चेहरे और गर्दन पर जलने के निशान अवश्य ही आएंगे, जबकि वर्तमान मामले में ऐसा कुछ भी नहीं पाया गया—आठ साल की अवधि में, मृतका के ससुराल में उसके साथ बुरे बर्ताव किए जाने के बारे में कभी कोई शिकायत नहीं की गई—आरोपी संदेह का लाभ प्राप्त करने का हक़दार—दोष-सिद्धि का आदेश अपास्त—अपील स्वीकार की जाती ह*

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