इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी व्यक्ति का किसी संपत्ति पर वास्तविक कब्जा (actual possession) है, तो उसे BNSS की धारा 164/165 के तहत बेदखल नहीं किया जा सकता।
केस का शीर्षक (Case Title):
इन्दु टंडन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य (Indu Tandon v. State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And 2 Others (2026)
तथ्य:-
मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि विपक्षी उसकी जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहा है और उसने जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत भी दर्ज कराई। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई, जिसके आधार पर सिटी मजिस्ट्रेट ने BNSS की धारा 165 के तहत संबंधित दुकान को अटैच कर दिया। हालांकि, प्रतिवादी ने इस आदेश को पुनरीक्षण में चुनौती दी, जहां अटैचमेंट आदेश को रद्द कर दिया गया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह पाया कि संबंधित संपत्ति पर वास्तविक कब्जा प्रतिवादी के पास था।
फैसले के मुख्य बिंदु:
➡️वास्तविक कब्जा मायने रखता है: यदि कब्जा स्पष्ट है और कोई व्यक्ति वहां रह रहा है, तो मजिस्ट्रेट सीधे तौर पर पुलिस रिपोर्ट पर कब्जा खाली नहीं करवा सकते।
➡️BNSS 164/165 (पुराना 145/146) का दायरा: यह धारा केवल शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए है, न कि स्वामित्व तय करने के लिए। यदि कब्जा पहले से ही स्थापित है, तो उस पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
➡️ऐसे मामलों में उचित उपाय सिविल अदालत के समक्ष मुकदमा दायर करना है, न कि प्रशासनिक कार्यवाही के माध्यम से बेदखली करना ।
