
20,000/- रु० से अधिक की नकद ऋण राशि, जो आयकर अधिनियम की धारा 269SS का उल्लंघन करते हुए दी गई हो, उसकी वापसी हेतु जारी किया गया चेक परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत “विधिक रूप से देय ऋण या दायित्व” की श्रेणी में नहीं आता—जब उक्त लेन-देन के संबंध में शिकायतकर्ता द्वारा आयकर अधिनियम की धारा 273B के तहत कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया और न ही उक्त राशि को आयकर विवरणी में प्रदर्शित किया गया तब ऐसा लेन-देन को अवैध होता है—पराक्रम्य लिखत अधिनियम की धारा 139 के तहत उपलब्ध उपधारणा को खंडित माना गया—परिणामस्वरूप अभियुक्त की दोषसिद्धि एवं दंड को निरस्त कर दिया गया—पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की जाती है।
