दीवानी विधि–संपत्ति विधि–उत्तराधिकार कानून–पंजीकृत वसीयत की प्रामाणिकता की उपधारणा–आपत्ति करने वाले पर भार—पंजीकृत वसीयत, साक्ष्य अधिनियम की धारा 114 के अधीन अपनी प्रामाणिकता के संबंध में विधिक उपधारणा के साथ आती है—यदि ऐसी वसीयत के निष्पादन (execution) का समर्थन सशक्त एवं ठोस साक्ष्यों द्वारा किया गया हो और उसका परीक्षण न्यायालय द्वारा अनुमोदन किया गया हो, तो उसकी प्रामाणिकता को चुनौती देने का भार आपत्ति करने वाले पक्ष पर स्थानांतरित हो जाता है—वर्तमान मामले में, उक्त वसीयत न केवल वादी को अधिकार प्रदान करती है अपितु प्रतिवादी को भी उसमें एक हिस्सा प्रदान करती है, जिससे वसीयत की निष्कपटता और अधिक पुष्ट होती है—अतः जब तक कोई संदेहास्पद परिस्थिति (suspicious circumstances) प्रदर्शित न की जाए, तब तक वसीयत की प्रामाणिकता प्रमाणित मानी जाएगी।

