चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोपित अभियुक्त के पास कौन-कौन से कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं?…

📘 चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोपित अभियुक्त के पास कौन-कौन से कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं?

जब किसी आपराधिक मामले में पुलिस जांच पूरी करके न्यायालय में (आरोप पत्र ) चार्जशीट दाखिल कर देती है, तो आरोपित अभियुक्त

👉 या तो वह उस जांच को चुनौती दे,
👉 या अदालत में खुद को आरोपमुक्त करने की कोशिश करे,
👉 या उसे जमानत लेनी पड़े।

📌 इस लेख में हम जानेंगे कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोपी किन-किन उपायों का सहारा ले सकता है, ताकि अपने अधिकारों की रक्षा कर सके और झूठे मुकदमे से उबर सके।

⚖️ 1. मजिस्ट्रेट के समक्ष Discharge Application (BNSS धारा 250 / CrPC 227)

यदि चार्जशीट में प्रथम दृष्टया अपराध नहीं बनता, और आरोपी को लगता है कि उसके खिलाफ झूठा आरोप लगाया गया है:

👉 आरोपी अपने वकील के माध्यम से Discharge Application दायर कर सकता है।

नोट : कई मामलों में माननीय हाईकोर्ट से ज़रिये अधिवक्ता Discharge Application move करने के लिए Direction लेना पड़ता है ।

➡️ यह आवेदन Charges Frame होने से पहले दायर किया जाना चाहिए।

📚 प्रमुख निर्णय:

Union of India v. Prafulla Kumar Samal, AIR 1979 SC 366
सुप्रीम कोर्ट ने कहा – यदि कोई भी “Prima Facie” साक्ष्य नहीं है, तो न्यायालय को आरोप तय नहीं करने चाहिए।

🧾 2. Further Investigation की मांग (CRPC की धारा 156(3), 173(8) / BNSS धारा 193(9))

अगर आरोपी को लगता है कि पुलिस ने जानबूझकर पक्षपातपूर्ण या अधूरी जांच की है, और उसके पास नये या छोड़े गए साक्ष्य हैं:

👉 वह मजिस्ट्रेट से Further Investigation की मांग कर सकता है।

📚 महत्वपूर्ण केस:

Vinubhai Haribhai Malviya vs State of Gujarat (2019) 17 SCC 1
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया – मजिस्ट्रेट आरोप तय होने से पहले Further Investigation का आदेश दे सकता है।

🔄 3. सेशन कोर्ट में रिवीजन (Revision) (CrPC 397 / BNSS 440)

यदि आरोपी को लगता है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद मजिस्ट्रेट ने समन आदेश (Summoning Order) बिना पर्याप्त आधार के पारित कर दिया है, तो:

👉 वह Session Court में Revision दायर कर सकता है।

➡️ यह विशेष रूप से तब होता है जब मजिस्ट्रेट Non-speaking Order पास करता है यानी बिना कारण बताए Summon करता है।

🛡️ 4. हाईकोर्ट में याचिका – समन आदेश रद्द (BNSS धारा 528 / पूर्व CrPC 482)

यदि आरोपी को लगता है कि—
• चार्जशीट बिल्कुल आधारहीन है,
• Summoning Order केवल प्रक्रिया का दुरुपयोग है,
• और निचली अदालत मनमाने ढंग से कार्रवाई कर रही है,

👉 तो वह सीधे माननीय उच्च न्यायालय में धारा 528 BNSS (पूर्व की 482 CrPC) के तहत याचिका दायर कर सकता है।

📚 महत्वपूर्ण निर्णय:

State of Haryana v. Bhajan Lal (1992 Supp (1) SCC 335)
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस जांच में किसी व्यक्ति को झूठा फंसाया गया हो और कोई अपराध नहीं बनता हो, तो हाईकोर्ट 482 CrPC के तहत मुकदमा रद्द कर सकता है।

🧑‍⚖️ 5. अग्रिम / नियमित जमानत (Anticipatory or Regular Bail)

यदि आरोपी को लगता है कि:
• उसके द्वारा किये गये सभी प्रयास विफल हो चुके हैं ।
• पुलिस उसे कभी भी गिरफ्तार कर सकती है, या
• चार्जशीट के बाद गिरफ्तारी की संभावना है,

👉 तो वह अग्रिम जमानत (धारा 438 CrPC / BNSS 482) या
👉 नियमित जमानत (धारा 439 CrPC / BNSS 480)
के लिए आवेदन कर सकता है।

📌 जमानत पर एक विस्तृत लेख अगले पोस्ट में प्रकाशित किया जाएगा।

📌 निष्कर्ष (Conclusion):

चार्जशीट दाखिल होते ही आरोपी को घबराने की आवश्यकता नहीं है। उसके पास विभिन्न विधिक विकल्प होते हैं:

✅ Discharge Application
✅ Further Investigation
✅ Revision
✅ High Court में Quashing Petition (528 BNSS)
✅ Regular / Anticipatory Bail

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