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SLP (Crl) No. 15585/2023
राजपाल बनाम राजस्थान राज्य

सुप्रीम कोर्ट ने आज निर्णय दिया है कि एक FIR से उत्पन्न सभी जमानत याचिकाएँ उच्च न्यायालय के एक ही न्यायाधीश के सामने प्रस्तुत की जाएंगी।
रिपोर्ट: अरुण कुमार गुप्त एडवोकेट इलाहाबाद हाईकोर्ट

देश के सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश देते हुए, न्यायाधीश सी.टी. रविकुमार और न्यायाधीश संजय कुमार की बेंच ने टिप्पणी की कि साजिद बनाम यू.पी. राज्य के मामले में अलाहाबाद के उच्च न्यायालय को दिए गए निर्देशों को भारत के सभी उच्च न्यायालयों में प्रभावी बनाया जाए।

साजिद बनाम यू.पी. राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:-

“हमने इलाहाबाद के उच्च न्यायालय से विभिन्न मामले देखे हैं, जिनमें एक ही FIR से उत्पन्न मामले विभिन्न न्यायाधीश के सामने प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इससे असमंजस्य होता है। उनका कहना है कि कुछ विद्वान न्यायाधीश याचिकायें मंजूर कर लेते हैं और कुछ अन्य विद्वान न्यायाधीश याचिका को मंजूर करने से इनकार करते हैं, यहां तक कि जब याचिकायें दाखिल करने वाले व्यक्तियों को लगभग समान भूमिका आरोपित की जा रही है।

हमारा मानना है कि यह उचित होगा कि एक एफआईआर से संबंधित सभी मामले एक ही न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध किए जाएं ताकि पारित आदेशों में एकरूपता बनी रहे। ।”

वर्तमान जमानत याचिका राजस्थान उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी। राजस्थान उच्च न्यायालय ने 29.08.2023 को एक अभियुक्त को जमानत दी थी और जबकि एक ही स्थिति में और एक सहयोगी अभियुक्त की जमानत याचिका दूसरी बेंच के सामने सूचीबद्ध हुई तो उसने 19.10.2023 को जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

सर्वोच्च न्यायालय ने इस आदेश की प्रति भारत के सभी उच्च न्यायालयों को भेजने का निर्देश दिया है और मुख्य न्यायाधीशों से इस संबंध में नीति बनाने को कहा है ।

अधिवक्ता ऋषि माटोलिया, एच. डी. थानवी, निखिल कुमार सिंह, महेंद्र सिंह ईन्दा याचिकाकर्ता के लिए उपस्थित हुए ।

मामला विवरण:-

SLP (Crl) No. 15585/2023
राजपाल बनाम राजस्थान राज्य

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