डीपफेक साइबर क्राइम व कानून…क़ानूनी जानकारी..

डीपफेक साइबर क्राइम व कानून

आइटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता, 1861 में इस तरह के आपराधिक कृत्य में शामिल अपराधियों के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए कई प्रविधान हैं।

आइटी एक्ट के सेक्शन 67 और 67ए के तहत अश्लील या कामुकता व्यक्त करने वाले कंटेंट को प्रकाशित या प्रसारित करना दंडनीय अपराध है।

अगर ये कंटेंट बच्चों से संबंधित है तो सेक्शन 67बी या पास्को एक्ट के प्रविधान लागू किए जा सकते हैं।

डीपफेक व्यक्ति के यूनीक फीचर्स का इस्तेमाल करके बनाए जाते हैं।

ऐसा करना आइटी एक्ट के सेक्शन 66सी के तहत अपराध है।

जब ऐसे डीपफेक का इस्तेमाल आप से आनलाइन चैट करने के लिए किया जाता है, ऐसे मामलों में आइटी एक्ट का सेक्शन 66डी लागू किया जा सकता है।

महिलाओं के खिलाफ अपराध में आइपीसी के कई प्रविधानों को लागू किया जा सकता है।

जैसे महिला की शालीनता भंग करने के मामले में आइपीसी का सेक्शन 509 लागू किया जा सकता है।

डीपफेक इलेक्ट्रानिक रिकार्ड की जालसाजी की श्रेणी में आता है। इसलिए आइपीसी का सेक्शन 463 से 471 लागू किया जा सकता है।

डीपफेक का इस्तेमाल करते हुए चुनाव से जुड़े अपराधों के लिए रिप्रजेंटेशन आफ पीपुल एक्ट, 1951 के प्रविधानों को लागू किया जा सकता है।

डीपफेक साइबर क्राइम व कानून

आइटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता, 1861 में इस तरह के आपराधिक कृत्य में शामिल अपराधियों के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए कई प्रविधान हैं।

आइटी एक्ट के सेक्शन 67 और 67ए के तहत अश्लील या कामुकता व्यक्त करने वाले कंटेंट को प्रकाशित या प्रसारित करना दंडनीय अपराध है।

अगर ये कंटेंट बच्चों से संबंधित है तो सेक्शन 67बी या पास्को एक्ट के प्रविधान लागू किए जा सकते हैं।

डीपफेक व्यक्ति के यूनीक फीचर्स का इस्तेमाल करके बनाए जाते हैं।

ऐसा करना आइटी एक्ट के सेक्शन 66सी के तहत अपराध है।

जब ऐसे डीपफेक का इस्तेमाल आप से आनलाइन चैट करने के लिए किया जाता है, ऐसे मामलों में आइटी एक्ट का सेक्शन 66डी लागू किया जा सकता है।

महिलाओं के खिलाफ अपराध में आइपीसी के कई प्रविधानों को लागू किया जा सकता है।

जैसे महिला की शालीनता भंग करने के मामले में आइपीसी का सेक्शन 509 लागू किया जा सकता है।

डीपफेक इलेक्ट्रानिक रिकार्ड की जालसाजी की श्रेणी में आता है। इसलिए आइपीसी का सेक्शन 463 से 471 लागू किया जा सकता है।

डीपफेक का इस्तेमाल करते हुए चुनाव से जुड़े अपराधों के लिए रिप्रजेंटेशन आफ पीपुल एक्ट, 1951 के प्रविधानों को लागू किया जा सकता है।

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