◆ श्रेणी ‘क’ के अपराध, जिनमें 7 वर्ष या उससे कम सज़ा का प्रावधान है, में प्रक्रिया :— न्यायालय में आरोप-पत्र (Charge-sheet)/परिवाद-पत्र (Complaint Case) प्रस्तुत किये जाने के बाद ज़मानत हेतु प्रक्रिया—
(i) सामान्यतः सम्मन जारी होने के पश्चात अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थिति अनुमन्य
(ii) यदि अभियुक्त सम्मन जारी होने के बाद भी उपस्थित ना हो तब व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए ज़मानतीय वॉरंट जारी किया जा सकता है
(iii) ज़मानतीय वॉरंट जारी होने के बावजूद उपस्थित होने में विफलता पर ग़ैर-ज़मानतीय वॉरंट जारी किया जा सकता है
(iv) ग़ैर-ज़मानतीय वॉरंट को अभियुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति के बिना भी निरस्त किया जा सकता है या उसे ज़मानतीय वॉरंट या सम्मन में भी परिवर्तित किया जा सकता है
(v) अभियुक्त के मूल ज़मानत प्रार्थना-पत्र के विनिश्चित होने तक अन्तरिम ज़मानत प्रदान करते हुए निस्तारित किया जा सकता है।
◆ यदि अभियुक्त को पूर्व में गिरफ़्तार नहीं किया गया है तथा उसने पूरी विवेचना के समय सहयोग किया है तब अन्वेषण अधिकारी द्वारा चार्ज-शीट दायर करते समय अभियुक्त को न्यायालय में पेश करने की अनिवार्यता नहीं है। (सिद्धार्थ v/s उ०प्र० राज्य, (2021) 1 SCC 676)
◆ न्यायालय द्वारा धारा 88, 170, 204 एवं 209, दण्ड प्रक्रिया संहिता के आवेदन पर विचार करते समय, ज़मानत प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करने के लिए नहीं कहा जायेगा।
◆ ज़मानत प्रार्थना-पत्र को दो सप्ताह में तथा अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail) को 6 सप्ताह के अन्दर निस्तारित किया जाएगा।

